Home बालाघाट ….गोरखंधधा… शासकीय सम्पत्ति की चोरी …कस्टम मिलिंग के लिये दी गई धान को बहार बेच… रिलीज आर्डर को दलालों के मार्फत बेचते राईस मिलर्स ….30 लाख क्विंटल धान खरीदी …..चूप्पी साधे अधिकारी

….गोरखंधधा… शासकीय सम्पत्ति की चोरी …कस्टम मिलिंग के लिये दी गई धान को बहार बेच… रिलीज आर्डर को दलालों के मार्फत बेचते राईस मिलर्स ….30 लाख क्विंटल धान खरीदी …..चूप्पी साधे अधिकारी

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सुधीर ताम्रकार। बालाघाट जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान के कस्टम मिलिंग किये जाने हेतु अनुबंधित राईस मिलर्स को धान प्रदाय करने के जो रिलिज आर्डर जारी किये जा रहे उन्हें वे खुलेआम बेचकर धान की कस्टम मिलिंग करने के बजाय अन्यत्र बेच रहे है नियमानुसार रिलीज आर्डर बेचे नही जा सकते।

इस संबंध में मध्यप्रदेश राज्य विपणन संघ के प्रबंधक संचालक श्री ज्ञानेश्वर पाटील को बालाघाट जिले में चल रहे इस गोरखंधधे के संबध में अवगत कराया गया तो उन्होने कहा की कस्टम मिलिंग के लिये दी गई धान को बेचा नही जा सकता वह शासकीय सम्पत्ति है। इस संबंध में यदि लिखित तौर पर प्रमाणिक शिकायत की जाती है तो वे जांच करवाकर संबंधित मिलर्स के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने की पहल करेगें।
विपणन संघ के जबलपुर स्थित क्षेत्रिय प्रबंधक श्री राजेन्द्र सिंह ने अवगत कराया की राईस मिलर्स को जो धान प्रदाय की गई है उसे ही कस्टम मिलिंग कर चांवल प्रदाय करना होगा यदि कोई मिलर्स संघ से प्रदाय की गई धान को बेचता है तो वह गंभीर मामला है यदि इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त होती है तो प्रमाणित होने पर मिलर्स को ब्लैकलिटेड कर उस पर कार्यवाही किये जाने के प्रावधान है।
विपणन संघ के अधिकारीयों के कथनानुसार यदि धान को अन्यत्र बेचा नही जा सकता तो बालाघाट जिले में वर्षों से धान के रिलीज आर्डर दलालों के मार्फत बेचने का सिलसिला कैसे चलाया जा रहा है आज तक इन नियमां के तहत किसी भी राईस मिलर्स पर कोई कार्यवाही नही की गई।
इस अनियमतिता पर जिला विपणन अधिकारी निर्धारित प्रावधानों के आधार पर कार्यवाही ना करते हुये धान की अवैध बिक्री पर चूप्पी क्यों साधे हुये है।
जिन अनुबंधित राईस मिलर्स,टेडर्स ने मार्कफेड से धान उठाई है उसकी मात्रा का भौतिक सत्यापन क्यों नही किया जाता?
चूंकि जिला विपणन अधिकारी के संरक्षण में धान के रिलीज आर्डर कमीशन की आड बेचे जा रहे है और धान बाहर भेजी जा रही है इस विसंगति के चलते इस बार फिर सार्वजनिक वितरण प्रणाली सहित आंगन बाडी,मध्यान्न भोजन तथा गर्भवती महिलाओं सहित अन्य हितग्राहियों को अमानक स्तर का अखादय चांवल परोसा जायेगा।
यह भी विचारणीय प्रश्न है की 2-3 वर्ष पूराना खाने के अयोग्य चांवल प्रदाय करने वाले राईस मिलर्स के विरूद्ध खादय सुरक्षा कानून में निहित प्रावधानों के तहत जिला प्रशासन की ओर से कार्यवाही क्यों नही की जाती?
यह उल्लेखनीय है कि इस वर्ष 30 लाख क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर खरीदी गई है जिसका कस्टम मिलिंग के माध्यम से चांवल बनाया जाना है लेकिन जिला विपणन अधिकारी,राईस मिलर्स की संलिप्तता के चलते पौष्टिक चांवल प्रदाय करने की बजाय उपभोक्ताओं को अमानक स्तर का अखादय चांवल खाने के लिये मजबूर होना पड रहा है।

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