Home बालाघाट घटिया चांवल प्रदाय करने वाले राईस मिलर्स को राहत पहुंचाने की कवायद जारी

घटिया चांवल प्रदाय करने वाले राईस मिलर्स को राहत पहुंचाने की कवायद जारी

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आनंद ताम्रकार। बालाघाट जिले में कस्टम मिलिंग पश्चात नागरिक आपूर्ति निगम को अमानक स्तर का चांवल प्रदाय किया जा रहा है जिसमें ब्रोकन की मात्रा निर्धारित मापदण्ड से ज्यादा पाई गई है।
प्रदाय किये गये ऐसे चांवल की भारतीय खादय निगम के गुणवत्ता नियंत्रक द्वारा जांच किये जाने पर लगभग 30 हजार बोरा चांवल श्रीजी एग्रो इंडस्टीज नेवरगांव कला का पाये जाने पर उसे बीआरएल कर दिया गया तथा प्रदाय कर्ता को 5 दिन के अंदर स्टाक को बदलकर गुणवत्ता के निर्धारित मापदण्ड के स्तर के चांवल बदलकर देने के निर्देश दिये जाने के बावजदू आज दिनांक तक चांवल बदला नही गया।
इस संबंध में सिवनी-बालाघाट लोकसभा सदस्य श्रीबोधसिंग भगत ने श्री रामविलास पासवान केन्द्रीय मंत्री खादय जनवितरण एवं उपभोक्ता मामले को शिकायत पत्र प्रेषित किया था जिसके परिपेक्ष्य में मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक श्री विकास नरवाल ने पत्र क्रमांक 980 दिनांक 1 मई 2018 जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम बालाघाट को निर्देशित करते हुये लिखा है की बालाघाट जिले में संग्रहित स्टाक का सयुक्त निरीक्षण आपूर्ति निगम तथा भारतीय खादय निगम के गुणवत्ता नियत्रंक द्वारा किये जाने पर मेसर्स माॅं अम्बे खुरसोडी गोदाम तथा सांईबाबा वेयरहाउस खुरसोडी में पाये गये स्टेक निर्धारित मापदण्ड के नही पाये गये है।
पत्र में निर्देशित करते हुये उल्लेखित किया गया है की सयुक्त निरीक्षण में अमानक स्तर के पाये गये स्टेकों को शिकायत के आधार पर जांच की पूर्ण कार्यवाही होने तक निर्गत नही किया जाये तथा धान की कस्टम मिलिंग में की गई अनियमितता को दृष्टिगत करते हुये संबंधित मिलर्स के विरूद्ध विपणन संघ से कार्यवाही करवाकर सूचित करें।
इसी परिपेक्ष्य में नागरिक आपूर्ति निगम बालाघाट के जिला प्रबंधक द्वारा प्रबंध संचालक नागरिक आपूर्ति निगम भोपाल को पत्र क्रमांक 771 दिनांक 21/7/2018 के माध्यम से अमानक स्तर के पाये गये स्टेक को निर्गत ना किये जाने के सबंध में उल्लेख किया है की बीआरएल पाये गये चांवल को मिलर्स से अपग्रेड नही किये जाने के संबंध में निरंतर लेख किया जा रहा है तथा चांवल को अपग्रेड करने हेतु नोटिस जारी कर दिया गया है।
इस तारतम्य में श्रीजी एग्रो नेवरगांव से प्राप्त प्रतिउत्तर में भारतीय खादय निगम द्वारा अमानक पाये गये स्टेकों की पून निरीक्षण कराये जाने की मांग की जा रही है।
मिलर्स से प्राप्त आवेदन के आधार पर पून निरीक्षण जांच कमेटी द्वारा बीआरएल चंावल की जांच की गई तथा जांच में अवगत कराया गया है की उक्त मिलर्स का स्टेक शासन द्वारा निर्धारित मापदण्ड के अनुसार है तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से प्रदाय किये जाने योग्य है।
पत्र में यह भी उल्लेखित किया गया है की लम्बे समय तक भण्डारण होने से चंावल में गुणात्मक हास हो रहा है अतएत पत्र में निवेदन किया गया है की श्रीजी एग्रो नेवरगांव द्वारा जमा चांवल जो भारतीय खादय निगम द्वारा बीआरएल पाया गया है वह पीडीएस में प्रदान करने योग्य है इसे प्रदाय करने से हितग्राहीयों को कोई गुणात्मक क्षति नही होगी अत मुख्यालय स्तर से उक्त मिलर्स की जांच करवाने/पीडीएस में प्रदाय करने की अनुमति देने का कष्ट करें।
इन पत्राचारों के आधार पर ऐसा प्रतीत होता है की अमानक स्तर के चंावल के स्टेक पाये जाने पर उसे अपग्रेड करने की बजाये सीधे सीधे अमानक चांवल को ठिकाने लगाने और प्रदायकर्ता राईस मिल को फायदा पहुचाने की कवायद की जा रही है।
प्रश्न उठता है की भारतीय खादय निगम के गुणवत्ता नियंत्रक द्वारा जांच किये जाने के बाद कौन सी उच्चस्तरीय जांच कमेटी ने अमानक पाये गये चंावल की गुणवत्ता का परीक्षण कर उसे मानक स्तर का बता दिया परीक्षण किस दिनांक को किया गया, परीक्षण किस के द्वारा करवाया गया पत्र में इसका कोई उल्लेख नही है, ना ही परीक्षण रिपोर्ट की प्रतिलिपि उपलब्ध कराई गई।
इतना ही नही दुसरी बार जांच करवाये जाने के बावजूद प्रबंध संचालक से पून जांच कराये जाने का क्या औचित्य है?
संबंधित राईस मिलर्स के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही करने तथा उसे ब्लैक लिस्ट करने की बजाय विगत वर्षों से चली आ रही अमानक पाये गये चांवल को कागजों में ही अपग्रेड करने की कवायद इस मामले में भी किये जाने आशंका प्रतीत हो रही है।
क्योंकि यह मामला 32 हजार 400 क्विंटल चंावल का है जिसकी कीमत 6 करोड रूपये आकी जा रही है।

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