Home बालाघाट जिला उद्योग एवं व्यापार केन्द्र बालाघाट ….सूचना के अधिकार के प्रावधानों का खुलकर मखौल उडाया.. मामला श्री पारबाईलिंग उद्योग मेंहदीवाड़ा

जिला उद्योग एवं व्यापार केन्द्र बालाघाट ….सूचना के अधिकार के प्रावधानों का खुलकर मखौल उडाया.. मामला श्री पारबाईलिंग उद्योग मेंहदीवाड़ा

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आनंद ताम्रकार। बालाघाट
जिले में सूचना के अधिकार के प्रावधानों का खुलकर मखौल उडाया जा रहा है, आधे से ज्यादा कार्यालयों में सूचना के अधिकार संबधी सूचना फलक नही लगे है तथा जिन अधिकारियों को लोकसूचना अधिकारी अपीलीय अधिकारी बनाया गया है उन्हें सूचना के अधिकार के प्रावधानों की जानकारी ही नही है।
इन विसंगतियों के चलते आवेदकों को नियत समय पर जानकारी उपलब्ध नही होती अथवा अकारण ही आवेदन अस्वीकार कर दिये जा रहे है कहीं कहीं तो अधिकारी आवेदन पत्र लेने से मना कर रहें है। इन कारणों से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड रहा है।
जिला उद्योग एवं व्यापार केन्द्र बालाघाट में सूचना के अधिकार के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने में आवेदकों को अधिकारियों की ना समझी के कारण सूचना प्राप्त करने में परेशान होना पड़ रहा है।ऐसे ही एक मामले में आवेदक सुधीर ताम्रकार पत्रकार द्वारा  को स्वीकृत अनुदान के संबंध में जानकारी मांगे जाने पर लोकसूचना अधिकारी द्वारा यह कहकर जानकारी देने से इंकार कर दिया की मांगी गई जानकारी तीसरे पक्ष से संबधित है। तीसरे पक्ष के द्वारा इस संबंध में जानकारी देने से मना कर दिया गया है।
लोक सूचना अधिकारी के द्वारा वांछित सूचना देने से इंकार कर दिये जाने पर आवेदक द्वारा प्रथम अपीलीय अधिकारी महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र बालाघाट के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई थी उनके द्वारा भी यह अवगत करते हुये अपील अमान्य कर दी गई की मांगी गई सूचना तीसरे पक्ष से संबंधित होने के कारण जानकारी प्रदान नही की जा सकती।
यह उल्लेखनीय है कि प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा आवेदक अपीलार्थी को अपना पक्ष रखने का अवसर नही दिया गया और तीसरे पक्ष के समर्थन में एक पक्षीय आदेश पारित करते हुये अपील अमान्य कर दी।
सूचना के अधिकार अधिनियम में धारा 19 में यह प्रावधान रखा गया है कि अपीलार्थी को सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिये इसके लिये उन्हें लिखित सूचना देकर 7 दिन की समयावधि देते हुये सुनवाई हेतु बुलाया जाना चाहिये।
लेकिन प्रथम अपीलीय अधिकारी ने प्राकृतिक न्यायसिद्धांत एवं सूचना के अधिकारों के प्रावधानों को उल्लघंन करते हुये आवेदक को सुनवाई में अपना पक्ष रखने का अवसर ना देकर एक पक्षीय निर्णय देते हुये सूचना देने से इंकार कर दिया।
यह उल्लेखनीय है कि किसी भी उपक्रम,उद्योग को शासन द्वारा कोई अनुदान अथवा आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया गोपनीय नही रहती तथा अनुदान सहायता की स्वीकृति के विभाग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक किया जा सकता है।
शासन की ओर से भी शासकीय आर्थिक सहायता, अनुदान स्वीकृत किये जाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाये रखने के निर्देश दिये है।
अनुदान प्राप्त करने वाले व्यक्ति/उद्योग जिसका संबंध तीसरे पक्ष से होता है उसे तीसरे पक्ष की गोपनीयता की श्रेणी में नही माना जा सकता इस आधार पर प्रथम अपील को अस्वीकार करना नियम संगत प्रतीत नही होता।
यह उल्लेखनीय है कि अपीलीय अधिकारी महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र बालाघाट द्वारा इसके पूर्व विभिन्न आवेदन पत्रों के माध्यम से उद्योगों को अनुदान राशि के संबंध में वांछित जानकारी उपलब्ध कराई गई है तो फिर किसी अन्य उद्योग के संबंध में मांगी गई अनुदान से संबंधित जानकारी देने से मना कर देना अधिकारी की कुत्सित मानसिकता का परिचायक है।
प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा जानकारी देने से आवेदन अमान्य कर दिये जाने के विरूद्ध सूचना आयुक्त द्वितीय अपील अधिकारी के समक्ष आवेदक द्वारा अपील सुनवाई हेतु प्रस्तुत की गई है।

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