Home बालाघाट नागरमोथा से तेल निकालने की अवैध फैक्ट्री का संचालन

नागरमोथा से तेल निकालने की अवैध फैक्ट्री का संचालन

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आनंद ताम्रकार। बालाघाट
जिले में नदी,तालाबों के किनारे एवं वन क्षेत्र मंे विकसित नालों में नागरमोथा नामक वनस्पति बहुतायत से पाई जाती है।
लघु वनोपज होने के बावजूद अधिकृत तौर पर इसके उत्खनन की व्यवस्था ना होने के कारण जिले में इसका अवैध उत्खनन कर नागरमोथा से तेल निकालने की एक अवैध फैक्ट्री तिरोडी तहसील के ग्राम हेटी में संचालित की जा रही है।
तिरोडी से 35 किलोमीटर दूर स्थित निजी भूमि स्थापित इस फैक्ट्री निर्माण के लिये ना तो भूमि का डायवर्सन कराया गया  है ना ही शासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई है।
यह उल्लेखनीय है की नागरमोथा एक औषधी परक वनस्पति है जिसका आयुर्वेद में प्राचीन काल से उपयोग कर विभिन्न रोगों के उपाचार में इसका उपयोग किया जाता है तथा हवन सामग्री तथा सुगंध के रूप में इसकी जडों का इस्तेमाल किया जाता है।
नागरमोथा का वृक्ष 2 से 3 फीट उपर होता जिसकी जडें गहरी होती है जड के नीचे गहरी में कंद लगता है जो अण्डाकार आकृति में काले रंग का होता है जिस पर रूोएॅं होती है और अंदर सुगन्धित मज्जा होती है इसी का उपयोग चिकित्सा और सुगंध के रूप मंे किया जाता है।
नागरमोथा की जड में एक प्रकार उडनसील तेल पाया जाता है जिसमें एल्बुमिन,वसा, शर्करा एवं एंटीसेप्टिक तत्व पाये जाते है।
आयुर्वेद के ग्रंथों में अवगत कराया गया है की इसका रस तिक्त कषाय और कटु होता है। यह लघु एवं रूक्ष गुणों से युक्त होता है इसका वीर्य शीत और पचने पर विपाक कटु होता है शीत वीर्य होने के कारण पित्तशामक और रूक्ष होने के कारण कफशामक होता है। इसके अलावा तृषादाहशमन, रक्तशोधक, मूत्रल, कृमी नाशक, स्तन्य शोधन और विषध्न होता है।
ऐसी गुणकारी वनस्पति को सुरक्षित रखने के लिये वनविभाग की ओर से कोई समूचित उपाय नही किये गये है जिसके कारण क्षेत्र में इसका अवैध उत्खनन किया जा रहा है।
ग्राम हेटी में नागरमोथा से तेल निकालने की फैक्ट्री स्थापित की गई है जिसमें प्रतिदिन 10 लीटर तेल निकाला जा रहा है बाजार मूल्य के अनुसार 15 हजार रूपये प्रतिलीटर पर उपलब्ध किया जाता है।
फैक्ट्री में नियमानुसार निर्माण कार्य नही किये जाने से तथा चिमनी की पर्याप्त उचाई नही होने से फैक्ट्री से निकलने वाले धुयें के कारण आसपास का वातावरण प्रदुषित हो रहा है।
फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों को ना तो तयशुदा मजूदरी नही दी जा रही है ना ही उनका श्रम विभाग में पंजीयन कराया गया है।
यह फैक्ट्री वनक्षेत्र की भूमि से लगकर स्थापित की गई है।
इस फैक्ट्री में महाराष्ट्र के मनसर की पेंच नदी, भण्डारा नदी, लेण्डेझरी,चिखली तथा मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले मे बावनथडी चंदन नदी तथा नालों से नागरमोथा की जडों को खुदवाकर हेटी स्थिति फैक्ट्री में लेजाकर आईल बनाया जा रहा है और शासन को इस बात की कोई जानकारी नही है।
इस सबंध में दक्षिण वनमण्डल सामान्य के वनमण्डल अधिकारी श्री प्रसाद को अवगत कराया गया तो उन्होने कहा की इस तरह की फैक्ट्री लगाये जाने की कोई जानकारी नही वे जानकारी लेकर यदि अवैध गतिविधियां पाई गई तो फैक्ट्री संचालन को कार्यवाही की जद में लाया जायेगा।

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