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फर्जी दस्तावेज बनाकर शासकीय भूमि में बन गया शापिंग काम्प्लेक्स

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आनंद ताम्रकार। बालाघाट
जिले के तहसील मुख्यालय वारासिवनी में दीनदयाल चैक में बनाये गये काम्प्लेक्स तथा भूमि का तहसीलदार वारासिवनी द्वारा गठित टीम ने गुरूवार को सीमाकंन किया
सीमांकन के दौरान विवादित भूमि शासकीय पाये जाने पर भूमि का नामातरण रद्द कर दिया गया एवं शापिंग काम्प्लेक्स बनाकर अतिक्रमित भूमि चिन्हित कर दी गई।
शिकायतकर्ता मानिक नगपुरे ने कलेक्टर बालाघाट तथा सीएम हेल्पलाइन में इस आशय की शिकायत दर्ज कराई थी की तहसील वारासिवनी के दीनदयाल चैक स्थित पटवारी हल्का नंबर 26/1,खसरा नंबर 632/2,624/1 के रकबा 0.003 हेक्टर भूमि के संबंध में राजस्व प्रलेखों में छेडछाड करते हुये कुटरचित दस्तावेज बनाकर शासकीय नजूल भूमि सीट क्रमांक 11 रकबा 622 वर्गभूमि की अफरा तफरा कर दी गई है।
भूमि के रकबा 0.003 हेक्टर को फर्जी दस्तावेज बनाकर 0.013 हेक्टर कर दिया गया जिसके आधार पर सन 2002-03 से 2010-11 तक पांच सालाना खसरा में प्रविष्टि भी कर दी।
इस भूमि को 2016 में फर्जी दस्तावेज बनाकर भूस्वामी शाहिस्ता खान व उनकी बेटियों ने वर्ष 2016 में जीतेन्द्र पूरी और मनोज लिल्हारे वारासिवनी निवासी को 16 लाख 48 हजार रूपये में बेच दी।
विक्रेता केवल 0.003 हेक्टर की ही मालिक थी लेकिन शासकीय भूमि को हडप करते हुये फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 0.013 बनाकर शासकीय नजूल भूमि की 0.010 भूमि को भी बेच दिया गया।
इस भूमि पर खरीददारों ने शापिंग काम्प्लेक्स बनाये जाने के लिये नगर पालिका परिषद वारासिवनी से भवन निर्माण की अनुमति प्राप्त कर काम्प्लेक्स का निर्माण कर लिया गया निर्माणाधीन काम्प्लेक्स 0.010 हेक्टर भूमि पर निर्मित किया गया है।
बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के राजस्व प्रलेखों में भूमि के रकबे में हेराफेरी पाये जाने पर तहसीलदार ने किये गये नामातरण को रद्द कर दिया गया तथा तत्कालीन पटवारी के खिलाफ कार्यवाही प्रस्तावित की गई।
शासकीय भूमि पर किये गये अतिक्रमण की जांच हेतु राजस्व निरीक्षक के नेतृत्व में जांच दल गठित किया गया था जिसने जांच के दौरान विवादित भूमि में 944 वर्गफीट का अवैध कब्जा नजूल भूमि पर पाया गया।
शीध्र ही शासकीय नजूल भूमि पर अतिक्रमण करते हुये बनाये गये शापिंग काम्प्लेक्स को तोडकर अतिक्रमित शासकीय भूमि को मुक्त कराया जायेगा यह जानकारी तीरथप्रसाद अक्षरिया नायब तहसीलदार ने दी है।
यह उल्लेखनीय है की प्रशासन द्वारा वर्ष 2005 में दीनदयाल चैक स्थित इसी भूमि पर बने यात्री प्रतिक्षालय डाक्टर विरेन्द्र जैन का दवाखाना तथा नीरज वर्मा की दुकान को अतिक्रमण किये जाने के कारण बुलडोजर से तोड दिया गया था इसके बावजूद नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों,अधिकारियों की इस बात की जानकारी रहने के बावजूद उन्होने लम्बी रकम लेकर निर्माणकर्ताओं को भवन निर्माण की अनुमति प्रदान कर दी।
इस मामले में नगर पालिका परिषद के सलिप्त अधिकारी कर्मचारियों के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिये।

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