Home बालाघाट शासन को करोडों रूपयों का चूना… बालाघाट से हजारों क्विंटल धान को बाजार में बेच दीया….. हरिओम ट्रेडर्स गोंदिया प्रो.विशाल सच्चानंद खटवानी….. ज्योति एग्रो इंडस्ट्रीज तुमखेडा प्रो. भरत भाई रंजनीकांत कातरानी गोदिया….. महाराष्ट्र राज्य सहकारी आदिवासी विकास महामण्डल नासिक का करोडों रूपये बकाया

शासन को करोडों रूपयों का चूना… बालाघाट से हजारों क्विंटल धान को बाजार में बेच दीया….. हरिओम ट्रेडर्स गोंदिया प्रो.विशाल सच्चानंद खटवानी….. ज्योति एग्रो इंडस्ट्रीज तुमखेडा प्रो. भरत भाई रंजनीकांत कातरानी गोदिया….. महाराष्ट्र राज्य सहकारी आदिवासी विकास महामण्डल नासिक का करोडों रूपये बकाया

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सुधीर ताम्रकार। बालाघाट जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान से चांवल बनाने के लिये कस्टम मिंलिग करवाने हेतु मध्यप्रदेश राज्य विपणन संघ बालाघाट द्वारा जिले के राईस मिलर्स की अवहेलना करते हुये गोंदिया के राईस मिलर्स को अंनुबध किये जाने में वरियता दी गई।
गोंदिया  के ऐसे राईस मिलर्स से भी कस्टम मिंलिग के लिये अनुबंध कर लिया गया जिन पर महाराष्ट्र राज्य सहकारी आदिवासी विकास महामण्डल नासिक की करोडों रूपयों की देनदारिया है।
सन 2012-13 की अवधि में बकाया करोडों रूपयों की राशि वसूलने के लिये राईस मिलर्स के विरूद्ध आरआरसी कार्यवाही महाराष्ट्र शासन द्वारा आदेशित की जा चूकि है।
महाराष्ट्र राज्य सहकारी आदिवासी महामण्डल नासिक के भण्डारा स्थित प्रादेशिक कार्यालय के व्यवस्थापक
श्री राजूरकर द्वारा सूचना के अधिकारी के तहत पत्र क्रमांक 467/2018 दिनांक 12 जून 2018 के माध्यम से अवगत कराया गया है की हरिओम ट्रेडर्स गोंदिया प्रो.विशाल सच्चानंद खटवानी पर 3 करोड 75 लाख 55 हजार 289 रूपये बकाया की तथा ज्योति एग्रो इंडस्ट्रीज तुमखेडा प्रो. भरत भाई रंजनीकांत कातरानी गोदिया पर 1 करोड 97 लाख 929 रूपये बकाया है।
इन राईस मिलों द्वारा किये गये अनुबंध के अनुसार बालाघाट से हजारों क्विंटल धान प्राप्त उसे बाजार में बेच दिया गया है और नियमानुसार नागरिक आपूर्ति निगम बालाघाट को प्राप्त धान से चांवल की कस्टम मिंलिग पर 1 क्विंटल चांवल भी जमा नही किया।
इस तरह कारगुजारी गोंदिया के अनेक मिलर्स द्वारा की गई है जिन्होने विपणन संघ से कस्टम मिंलिग के लिये अनुबंध किया है।
यह उल्लेखनीय है की इन राईस मिलर्स द्वारा उन्हें प्राप्त रिलिज आर्डर अथवा धान प्राप्त करने के एवज में विपणन संघ के अधिकारियों को 10 रूपये प्रतिक्विंटल की दर से कमीशन दिये जाने की जानकारी प्राप्त हुई है।
इन राईस मिलर्स पर महाराष्ट्र शासन की बकाया राशि होने की जानकारी जिला विपणन संघ सहित प्रादेशिक मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को रही है लेकिन अनुबंध करने के नाम पर लाखों रूपये का लेनदेन कर अनुबंध कर दिया गया।
प्राप्त धान बेचकर आज तक चांवल ना जमा किया जाना एक बडी साजिश का अंग है धान प्राप्त कर 45 दिन के अंदर चांवल की अनुपातिक मात्रा जमा करने के नियम होने के बावजूद जिला प्रशासन,खादय विभाग, विपणन संघ तथा नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा मिलर्स से चांवल वसूली हेतु अब तक कोई कार्यवाही ना किया जाना मिलीभगत का नतीजा दिखाई दे रहा है जिसके चलते शासन को करोडों रूपयों का चूना लगने वाला है।
इस संबंध में मध्यप्रदेश राज्य विपणन संघ के भोपाल के महाप्रबंधक उपार्जन श्री योगेश जोशी को अवगत कराये जाने पर उन्होने कहा की वे विपणन संघ बालाघाट से जानकारी प्राप्त कर अवगत करा सकेगें।
उन्होने यह भी अवगत कराया की कस्टम मिंलिग के लिये अनुबंध कराये जाने के बाद धान प्राप्त कर चांवल जमा ना कराये जाने संबंध में जो जानकारी मिली है वह गंभीर मामला है चूकि जिला विपणन संघ बालाघाट के जिला प्रबंधक अवकाश पर है उनसे जानकारी लेकर ही कार्यवाही की जायेगी।

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