Home बालाघाट सारे सबूतों का राम नाम सत्य: बालाघाट में 9000 क्विंटल प्याज का खेल….मप्र प्याज घोटाला

सारे सबूतों का राम नाम सत्य: बालाघाट में 9000 क्विंटल प्याज का खेल….मप्र प्याज घोटाला

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आनंद ताम्रकार/बालाघााट। मप्र प्याज घोटाला सबके सामने आ चुका है। एक अधिकारी जेल में है, दूसरा सस्पेंड किया जा चुका है। यहां भी कुछ ऐसा ही हुआ है। अफसरों ने हाल ही में कुछ प्याज दफन की है। दस्तावेजों में दर्ज किया गया है कि 9 हजार क्विंटल प्याज नीलाम होने से पहले ही सड़ गई। लोगों को दुर्गंध आ रही थी अत: गड्डा खोदकर दफना दी गई। इसी के साथ यह मामला संदेह की जद में आ गया है।
अधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 20/6/2017 को 24693 क्विंटल, 31329 बोरा, 30/6/2017 को 20732 क्विंटल-26229 बोरा तथा 4/7/2017 को 21502 क्विंटल-37624 बोरा प्याज की आमद दर्ज की गई। इसमें से लगभग 9 हजार क्विंटल प्याज रखरखाव में लापरवाही करके सड़ा दी गई। इसके बाद प्याज को गहरे गढ्ढे खोदकर दफन कर दिया गया। इस मामले ने एक साथ 2 संदेह पैदा कर दिए हैं।
कमीशन नहीं मिला इसलिए सड़ा दी
खुलासा हो चुका है कि प्याज खरीदने के लिए व्यापारियों की लाइन लग गई थी परंतु अधिकारियों ने केवल उसी व्यापारी को प्याज दी जिससे कमीशन मिला। कमीशन के लिए प्याज को मांगदर से कम पर भी नीलाम किया गया। नीलामी प्रक्रिया भी फिक्स की गई। सवाल यह है कि क्या यहां भी ऐसा ही हुआ है। अधिकारियों को मनचाहा कमीशन नहीं मिला इसलिए उन्होंने प्याज नीलाम ही नहीं की। ईमानदारी से प्याज खरीदने आया व्यापारी खाली हाथ लौटा दिया गया।
तिल को ताड़ तो दर्ज नहीं कर लिया गया
संदेह यह भी है कि क्या सचमुच 9 हजार क्विंटल प्याज ही सड़ गई थी। कहीं ऐसा तो नहीं कि प्याज को सड़ाकर दफनाया ही इसलिए गया ताकि 9 हजार क्विंटल का खेल किया जा सकता। संभव है इसका एक बड़ा हिस्सा ​बिना दस्तावेजो में दर्ज किए ही व्यापारियों को बेच दिया गया हो। शाजापुर में तो केवल कमीशन का खेल हुआ था। यहां पूरी प्याज ही घोटाले की भेंट चढ़ गई हो। एक छोटे हिस्से को योजनाबद्ध तरीके से सड़ाया गया और फिर दफन कर दिया। सारे सबूतों का भी राम नाम सत्य।
उचित क्या होता, क्या कर सकते थे
3 रूपये प्रतिकिलो की दर से प्याज भी बिक्री आमजन के बीच की गई थी। वितरण व्यवस्था सही ढंग से की गई होती तो सामान्य उपभोक्ता को प्याज मिल जाती। सार्वजनिक वितरण प्रणाली और चौक बाजारों में प्याज वितरित की जा सकती थी। ऐसा होता तो उपभोक्ता को सहजता से कम दर पर प्याज मिल जाती और सरकार को घाटा भी ना होता। बाजार में अभी भी 6 से 10 रुपए प्रतिकिलो की दर से प्याज बेची जा रही है।
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