Home बालाघाट सावधान! चिन्नौर, कालीमूंछ व बासमती चावल में जहरीले रसायन की मिलावट.. 70 से 100 प्रतिकिलो की दर से बेच रहे है

सावधान! चिन्नौर, कालीमूंछ व बासमती चावल में जहरीले रसायन की मिलावट.. 70 से 100 प्रतिकिलो की दर से बेच रहे है

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आनंद ताम्रकार/बालाघाट। यदि आप भोजन में सुंगधित चावल का उपभोग कर रहे है तो सावधान हो जाएं। हो सकता है आप जिस चावल का उपयोग कर रहे है उसमें जहरीले रसायन मिलाकर चिन्नौर, कालीमूंछ, बासमती की खुशूबू डालकर बनाया गया हो। कृत्रिम सुंगध से बने चावल का उपयोग करने से कैंसर जैसी बीमारी आपके शरीर को खोखला कर सकती है। सादा चावल में प्राप्रेलांन ग्लायकाल नामक रसायन मिलाकर उसे सुगंधित बनाया जा रहा है जो आपके स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है।
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में सीमित क्षेत्र में चिन्नौर का उत्पादन किया जाता है लेकिन कालीमूंछ नामक प्रजाति की धान का उत्पादन इस जिले में होता ही नही फिर भी हजारों क्विटंल चावल नकली चिन्नौर और कालीमूंछ बताकर बेचा जा रहा है। प्राप्रेलांन ग्लायकाल नामक रसायन से बने तरल एवं पाउण्ड डालकर प्राकृतिक रूप से उत्पादित चावल को कृत्रिम सुंगध बनाकर उसे चिन्नौर, कालीमूंछ, बासमती और अन्य नामों से राईस मिलर्स धड़ल्ले से बेच रहे है और मुनाफा कमा रहे है।
इस कारगुजारी से सामान्य उपभोक्ता जो सुंगधित चावल का उपयोग करता है उसकी सेहत के साथ खिलवाड किया जा रहा है। इस संबंध में प्रशासन को शिकायत किये जाने के बावजूद आज तक राईस मिलर्स के खिलाफ ना तो कोई कार्यवाही की गई ना ही नकली सुंगध से बने चावल की बिक्री पर कोई अंकुश लगाया गया।
नकली सुंगध बनाने के लिये आवश्यक तरल एवं पाउण्डर बनाने कंपनी जगन इडस्टीज दिल्ली के मालिक इश्वर षर्मा से हुई फोन पर बातचीत में उन्होने बताया की चावल की ग्रेडिंग कर बाजार की मांग के अनुसार सुगंधित चावल की प्रजाति के आकार प्रकार का चावल में तरल रसायन और पाउण्डर मिलाकर नकली सुंगध तैयार की जा सकती है। उन्होने यह भी बताया की हम तो 400 से 500 तरह की खुशबू वाले पाउण्डर बनाते है आपको जिस तरह की खुशबू चाहिये उस खुशबू का पाउण्डर हम तैयार कर देते है।
ईश्वर शर्मा ने बताया की हम तो सिर्फ फ्लेवर देते है। नुस्खा बेचते है पाउडर मिठाई, फास्टफुड, सास, चाकलेट में भी ये मिलाया जाता है। पैकिंग करने वालों को नियमानुसार पैकेट पर एडेड फ्लेवर लिखना चाहिये मगर उत्पादक लिखता नही है।
यह उल्लेखनीय है की सामान्य चावल जिसकी कीमत बाजार में 25 से 30 किलो है उसमें खुशबूदार पाउण्डर मिलाकर राईस मिलर्स इसे 70 से 100 प्रतिकिलो की दर से बेच रहे है। खादय सुरक्षा एवं क्वालिटी कंट्रोल कानून के अनुसार प्राकृतिक उत्पादक में कृत्रिम सुंगध मिलाकर बेचना गंभीर अपराध है लेकिन खादय सुरक्षा कानून के परिपालन कराने के लिये जो अमला तैनात है उसकी राईस मिलर्स से सांठगांठ होने के कारण कोई कार्रवाई नही की जा रही है। आखिर कब तक रोजाना उपभोग किये जाने वाले चावल में जहरीले रसायन मिलाकर नकली खुशबू से बनाये गये चावल की बिक्री होती रहेगी और आम आदमी के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड होता रहेगा।
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