Home बालाघाट 31 लाख क्विंटल धान… 500 करोड रूपये का भुगतान…. बंद पडी राईस मिलों से अनुबंध…. धान परिवहन का फर्जी बिल.. यूपी बिहार से चांवल सप्लाई ..कमिषन के चलते अधिकारी, विघायक.. सांसद.. मंत्री.. विपक्ष.. इस गोरखधंधे पर चुप्पी साधें

31 लाख क्विंटल धान… 500 करोड रूपये का भुगतान…. बंद पडी राईस मिलों से अनुबंध…. धान परिवहन का फर्जी बिल.. यूपी बिहार से चांवल सप्लाई ..कमिषन के चलते अधिकारी, विघायक.. सांसद.. मंत्री.. विपक्ष.. इस गोरखधंधे पर चुप्पी साधें

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सुधीर ताम्रकार। बालाघाट मध्यप्रदेष में समर्थन मूल्य पर सर्वाधिक धान बालाघाट जिले में किसानों से खरीदी जाती है बालाघाट जिला प्रदेष का प्रमुख धान उत्पादक जिला है। गत वर्श 2016-17 में 31 लाख क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर सहकारी समितियां के माध्यम से खरीदी की गई थी जिस पर किया गया।समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान को गोदामों में ओपन केप में भण्डारित करने तथा धान को कस्टम मिलिंग के माध्यम से चांवल बनाने की प्रक्रिया मध्यप्रदेष राज्य विपणन संघ (मार्कफेड) के माध्यम से की जा रही है,कार्यो को सम्पादित करने के लिये धान तथा चांवल का परिवहन तथा कस्टम मिंलिंग के लिये राईस मिलर्स से अनुबंध किये जाने का दायित्व मार्कफेड बालाघाट को सौंपा गया है।
इन कार्यों की आड में जिला विपणन अधिकारी एवं लेखा अधिकारी की सांठगांठ से खुलेआम कमिषनबाजी का खेल चल रहा है।
कस्टम मिंलिंग किये जाने के लिये जिले के राईस मिलर्स से 5 रू./क्विटंल तथा जिले के बाहर के राईस मिलर्स से 10 रू.प्रति क्विंटल की दर से कमिषन वसूला जा रहा है, कमिषन लेने के बाद अनुबंध करने वाले राईस मिलर्स को अवैधानिकता करने की खुली छुट दी जाती है जिले में तथा जिले के बाहर की उन राईस मिलों से अनुबंध किया जा रहा है जो बंद पडी है तथा उन मिलर्स पर महाराश्ट सरकार का करोडो रूपये बकाया है।
मिलर्स गोदामों और ओपन केप से धान उठाने के बाद उसके रिलिज आर्डर खुले बाजार में बेच देते है तथा धान का परिवहन का फर्जी बिल बनाकर ट्रक भाड़ा भी मार्कफेड से वसूल कर रहे है।
यह उल्लेखनीय है कि जिला विपणन अधिकारी द्वारा बालाघाट जिले के राईस मिलर्स की बजाये जिले के बाहर महाराश्ट्र के राईस मिलर्स से अनुबंध करने में विषेश रूची लेते है क्योंकि स्थानीय मिलर्स से 5रू. क्विंटल की बजाये जिले के बाहर के राईस मिलर्स 10 रू. प्रतिक्विंटल की दर से कमिषन लिया जा रहा है।
जिला विपणन अधिकारी द्वारा यह बताया जाता है कि जिले के मिलर्स की क्षमता जिले के बाहर के मिलर्स की तुलना में ना होने के कारण बाहर के मिलर्स को कस्टम मिंलिंग के लिये अनुबधित कर उन्हें धान दी जा रही है जिले के बाहर के मिलर्स भी गोदामों तथा ओपन केप से धान उठाकर स्थानीय उश्णा मिलों तथा खुले बाजार में धान बेच देते है तथा यूपी बिहार से चांवल बुलवाकर नागरिक आपूर्ति निगम को चांवल प्रदाय कर रहे है।
इस तरह समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी और कस्टम मिंलिंग के माध्यम से चांवल बनाने के लिये अनुबंध करने की आड में राईस मिलर्स से करोडों रूपयों का कमिषन वसूला जा रहा है।
लेखा अधिकारी द्वारा राईस मिलर्स से कहा जाता है कि कमिषन की वसूली की राषि जो लाखों में नही करोडों रूपये में होती है जिले के आला अफसरों से लेकर मार्कफेड के भोपाल मुख्यालय के अधिकारियों तथा मंत्रीयों तक सौगात के रूप में भिजवाया जा रहा है।
कमिषन मिलने के बाद अधिकारी, राजनेता इस गोरखधंधे पर चुप्पी साधें हुये है, इस तरह मार्कफेड में कमिषन की आड में करोडों रूपये उगाही खुलेआम चल रही है सब को पता है लेकिन सब चूप है?
समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी और कस्टम मिंलिंग करवाने की भ्रश्ट प्रक्रिया के चलते जिले की राईस मिलें जल्द ही बंद होने की कगार पर पहुंच गई है।

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