Home बालाघाट 5 वर्षीय अबोध बालिका अकेला देखकर गलत काम कर दिया …….आजीवन कारावास की सजा

5 वर्षीय अबोध बालिका अकेला देखकर गलत काम कर दिया …….आजीवन कारावास की सजा

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आनंद ताम्रकार बालाघाट। जिले के लांजी पुलिस थाना अंतर्गत जेवनारा ग्राम निवासी गजेन्द्र रिसिम को 5 वर्षीय अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में धारा 450,376(2)(झ)आइपीसी तथा धारा 5(ड)/6 के लैंगिक अपराध से बालकों को सरक्षण अधिनियम के तहत आजीवन कारावास की सजा श्रीरामजीलाल ताम्रकार द्वितीय सत्र अपर न्यायाधीश बालाघाट ने आज सुनाई है।
दिनांक 2/7/2017 को पिडिता की मां द्वारा थाना प्रभारी लांजी को इस आशय की लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी की 2/7/2017 को सुबह लगभग सुबह 11ः30 बजे जब उसका पति खेत पर कृषि कार्य हेतु गया था तथा घर पर अपनी बड़ी पूत्री पिडिता 5 वर्ष एवं छोटी पूत्री 2 वर्ष के साथ घर पर थी तथा वह घरेलू काम क रही थी तभी पडोस में रहने वाला आरोपी गजेन्द्र रिसिम उसके घर पर आया वह उसके घर पर बच्चियों को खेलने खिलाने के लिये आता जाता रहता था।
पिडिता की मां झडु लगा रही थी तथा सफाई करके आगन का कचरा इक्ठा कर फैकने के लिये घर के बाहर थोडी दूर पर चली गई उसके साथ उसकी छोटी बेटी भी पीछे पीछे आ गई थी कचरा फैक कर लगभग 15मिनट बाद घर वापस आई तो उसने अपनी पिडिता बेटी को घर की छपरी में बेटी को रोते हुये देखा वह डरी हुई थी तथा पास ही में बिस्तर पर बिछी चादर में खून लगा देखा पिडिता के कपडे लेगी और फ्राक में खून दिखाई दिया पूछने पर उसकी बेटी ने बताया की आरोपी गजेन्द्र बाबा ने गंदा काम किया है इस कारण खून निकला और पेशाब की जगह में दर्द हो रहा है।
इस दौरान गजेन्द्र उसके घर से भाग गया था आरोपी गजेन्द्र आधे घण्टे बाद वापस आया और खूद उसने अपने मूंह से बताया की भाभी उससे गलती हो गई है उसने पिडिता को अकेला देखकर गलत काम कर दिया जिसके कारण उसके शरीर से खून निकला।
उसने यह भी बताया की उसने आपके देवर और पति को फोन पर घटना की जानकारी दे दी है।
इस दौरान उसके पति खेत से बाहर आ गये और गांव वाले भी घर पर आ गये तभी वह पिडिता को अपने पति के साथ लेकर आरोपी के विरूद्ध पुलिस थाना पहुंचकर घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई।
माननीय न्यायालय ने सुनवाई पश्चात धारा 376(2)(झ) आइपीसी एवं धारा 5(ड)/6 लैगिंक अपराध से बालकों को सरक्षण अधिनियम के अपराध में दोषी सिद्ध पाकर आरोपी को आजीवन कारावास की सजा जिसका तात्पर्य अभियुक्त के शेष प्राकृत जीवन काल के लिये सश्रम कारावास अभिपेत होगा एवं 2 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है अर्थदण्ड अदा ना करने पर व्यतिक्रम के फलस्वरूप अभियुक्त को 3 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

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